nomad on a soul searching JOURNEY...
Saturday, 1 August 2015
कोकून से क्या निकला...
कोकून से क्या निकला
सारे दर्द भूल गया
मैं अब शब्दों की रेशम बुनता हूँ...
वो टूट के गिरा...
वो टूट के गिरा और बिखर गया
काफी कोशिशों के बाद फिरसे जुड़ पाया है
कुछ अलग सा दिखता है अब
कुछ टुकड़े आज भी खोज रहा है...
टटोल लेता हूँ डायरी...
टटोल लेता हूँ डायरी कभी-कभी
जब भूल जाता हूँ अपने आप को
मेरी डायरी के पन्ने, मुझे मुझसे बेहतर जानते हैं...
सैकड़ों जिंदगी जिया मैं...
सैकड़ों जिंदगी जिया मैं
हज़ारों बार गिरा मैं
गिर के गर मर भी गया
अगले ही पल जिंदगी से मिला मैं...
डायरी की मिट्टी में...
डायरी की मिट्टी में दफनाई थी कुछ यादें
कभी-कभी कुछ बूँद गिरी थी आँखों से मिट्टी में
कुछ अँकुर आये, फिर पौध बनी
आज खिला है पूरा बाग़
पूछा मैंने फूलों से...
दफनाए तो पन्ने थे, कब-कैसे सब ये बीज बने ?
Tuesday, 28 July 2015
कलाम...
कलाम केवल नाम नहीं
कलाम एक उड़ान है सपनों की
कलाम एक पहचान है व्यक्तित्व की
कलाम एक मुस्कान है बचपन की
कलाम एक तस्वीर है विज्ञान की
कलाम एक सोच है राष्ट्र-निर्माण की
कलाम एक यात्रा है इंसान की
कलाम कहीं गया नहीं
कलाम अब एक रोशनी है आसमान की...
Friday, 17 July 2015
प्लूटो का दिल...
हज़ारों हवा की परतें पार की
फिर दिखा प्लूटो का दिल
तुमने प्यार के पंख खरीदकर मान लिया चाँद मिल गया...
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