Saturday, 1 August 2015

उसे अब चाँद की तमन्ना नहीं...

उसे अब चाँद की तमन्ना नहीं
वो इन बातों से ऊपर उठ बन गया है तारा

वो चमका रहा है कुछ आँखें अँधेरे में
मरेगा जब रोशन करेगा उम्मीदें कुछ बुझती हुई...

चाँद जैसा था वो ...

चाँद जैसा था वो
कुछ रंग उसके हमेशा ही अँधेरे में रहे

पूनम की रात कभी आई ही नहीं उसे जानने को...

पानी पे लिखा एक वादा...

पानी पे लिखा एक वादा
गर्मियों में उड़ गया
बरसात संग बरसा फिरसे
पर पानी में गुम गया

पारा कभी जमा नहीं
और समुन्दर में ये घुल गया
खारा था शायद वादा
बस खारेपन को मिल गया...

कुछ ज्यादा ही मीठी हैं यादें...

कुछ ज्यादा ही मीठी हैं यादें
हर बार आँखें नमकीन कर देती हैं...

वो देखता रहा उसको कुछ ऐसे...

वो देखता रहा उसको कुछ ऐसे
याद हो कोई भूली-बिसरी जैसे...

बहरों से भरे समाज में...

बहरों से भरे समाज में
खामोशियों ने भी चिल्लाना सीख लिया है

देखो, शायद कोई बात बन जाए...

आम आदमी की कीमत...

लाइफ इन्स्योर्ड करवाके
टेंशन हज़ारों संग लेकर चलता है

आम आदमी की कीमत सबको पता है...